AI chatbots: आज के समय में जब भी हमें कोई छोटी या बड़ी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या होती है, तो हम तुरंत इंटरनेट या AI चैटबॉट्स की मदद लेने लगते हैं। यह आसान भी है और तेज भी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो जवाब हमें मिल रहे हैं, वे कितने सही हैं? हाल ही में आई एक नई स्टडी ने इस भरोसे को थोड़ा हिला दिया है।
BMJ Open में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, AI चैटबॉट्स द्वारा दिए गए मेडिकल जवाबों में से लगभग आधे जवाब अधूरे या गलत पाए गए हैं। यह बात इसलिए और गंभीर हो जाती है क्योंकि आज लाखों लोग रोज़ाना स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी के लिए इन्हीं टूल्स पर भरोसा कर रहे हैं।
किन AI चैटबॉट्स पर किया गया अध्ययन

इस शोध में दुनिया के कुछ प्रमुख AI चैटबॉट्स को शामिल किया गया, जिनमें ChatGPT, Gemini, Meta AI, Grok और DeepSeek जैसे प्लेटफॉर्म शामिल थे। इन सभी चैटबॉट्स से अलग-अलग मेडिकल सवाल पूछे गए और उनके जवाबों का गहराई से विश्लेषण किया गया। खास बात यह थी कि सवाल ऐसे बनाए गए थे, जो आम लोग अक्सर पूछते हैं।
कैसे किया गया परीक्षण
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कैंसर, वैक्सीन, पोषण, स्टेम सेल और एथलेटिक परफॉर्मेंस जैसे विषयों पर सवाल पूछे। कुल मिलाकर हर चैटबॉट से कई तरह के सवाल पूछे गए, जिनमें कुछ सीधे जवाब वाले थे और कुछ खुले सवाल थे। इन जवाबों को संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों ने जांचा और यह देखा कि कौन सा जवाब सही है, कौन अधूरा है और कौन नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा, चैटबॉट्स द्वारा दिए गए रेफरेंस यानी वैज्ञानिक स्रोतों की भी जांच की गई।
क्या कहती है रिपोर्ट: आधे जवाब में समस्या
रिपोर्ट के मुताबिक करीब 49.6% जवाब ऐसे थे, जिनमें किसी न किसी तरह की समस्या पाई गई। इनमें से लगभग 30% जवाब कुछ हद तक गलत या अधूरे थे, जबकि करीब 19.6% जवाब गंभीर रूप से गलत या संभावित रूप से नुकसानदायक माने गए। यह आंकड़ा यह बताने के लिए काफी है कि AI पर आंख बंद करके भरोसा करना कितना जोखिम भरा हो सकता है, खासकर जब बात स्वास्थ्य की हो।
किस क्षेत्र में बेहतर और कहां कमजोर रहे चैटबॉट्स
अध्ययन में यह भी सामने आया कि चैटबॉट्स कुछ विषयों पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं, जबकि कुछ में उनकी जानकारी काफी कमजोर होती है। वैक्सीन और कैंसर से जुड़े सवालों में चैटबॉट्स का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। लेकिन जब बात स्टेम सेल, पोषण और एथलेटिक परफॉर्मेंस की आई, तो जवाबों में ज्यादा गलतियां देखने को मिलीं। यह अंतर इस बात को दर्शाता है कि AI अभी भी हर विषय में समान रूप से सक्षम नहीं है।
जवाबों में आत्मविश्वास, लेकिन सच्चाई अधूरी
इस अध्ययन की एक और दिलचस्प बात यह रही कि चैटबॉट्स अपने जवाब पूरे आत्मविश्वास के साथ देते हैं, चाहे जानकारी सही हो या नहीं। बहुत कम मामलों में उन्होंने यह बताया कि वे पूरी तरह निश्चित नहीं हैं। 250 सवालों में से केवल 2 बार ही चैटबॉट्स ने जवाब देने से मना किया। इसका मतलब है कि ज्यादातर समय वे बिना किसी चेतावनी के जवाब देते हैं, जो उपयोगकर्ताओं को भ्रमित कर सकता है।
संदर्भ और जानकारी की गुणवत्ता भी कमजोर
जब चैटबॉट्स से वैज्ञानिक संदर्भ देने को कहा गया, तो उनकी गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं पाई गई। कई मामलों में दिए गए रेफरेंस अधूरे या गलत थे। यह समस्या इसलिए गंभीर है क्योंकि लोग अक्सर इन रेफरेंस को सही मानकर भरोसा कर लेते हैं, जबकि वे पूरी तरह सटीक नहीं होते।
क्यों जरूरी है सावधानी बरतना
आज AI चैटबॉट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, खासकर ऐसे लोगों के बीच जो विशेषज्ञ नहीं हैं। वे इन्हें एक सर्च इंजन की तरह इस्तेमाल करते हैं और स्वास्थ्य से जुड़े फैसले भी इनसे मिली जानकारी के आधार पर लेने लगते हैं। लेकिन यह अध्ययन हमें यह सिखाता है कि AI एक सहायक टूल हो सकता है, लेकिन यह डॉक्टर या विशेषज्ञ की जगह नहीं ले सकता।
भविष्य में क्या सुधार संभव है
AI टेक्नोलॉजी लगातार विकसित हो रही है और आने वाले समय में इसमें सुधार की पूरी संभावना है। अगर डेटा की गुणवत्ता बेहतर की जाए और सिस्टम को ज्यादा सटीक बनाया जाए, तो यह एक मजबूत हेल्थ सपोर्ट टूल बन सकता है। लेकिन तब तक जरूरी है कि हम इसका इस्तेमाल समझदारी से करें और किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के लिए विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
तकनीक और भरोसे के बीच संतुलन

AI हमारे जीवन को आसान बना रहा है, इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन हर तकनीक की अपनी सीमाएं होती हैं और उन्हें समझना बहुत जरूरी है। यह अध्ययन हमें यही याद दिलाता है कि तकनीक पर भरोसा करना ठीक है, लेकिन आंख बंद करके भरोसा करना सही नहीं है। खासकर तब, जब बात हमारी सेहत की हो।
Disclaimer: यह लेख एक अध्ययन पर आधारित जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए कृपया योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। AI चैटबॉट्स से मिली जानकारी को अंतिम सत्य न मानें।
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